Strategy and Approach : Sociology

समाजशास्त्र : सम्यक् रणनीति एवं दृष्टिकोण

संघ लोक सेवा आयोग एवं राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित एवं संचालित सिविल सेवा परीक्षाएँ देश की सर्वोत्कृष्ट एवं सर्वाधिक सम्मानित सेवा परीक्षाएँ हैं। प्रत्येक वर्ष लाखों अभ्यर्थी इसमें सफलता प्राप्त करने का स्वप्न देखते हैं, लेकिन कुछेक अभ्यर्थी ही सफलता की अन्तिम सीढ़ी को पार कर पाते हैं। अतएव स्पष्ट है कि इस परीक्षा में अंतिम रूप से सफल होने के लिए परीक्षा की रणनीति की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाती है। परीक्षा की रणनीति के सन्दर्भ में अभ्यर्थियों के समक्ष मुख्य परीक्षा हेतु विषय-चयन एक महत्त्वपूर्ण एवं निर्णायक पहलू के रूप में उभरकर सामने आता है। चूंकि मुख्य परीक्षा में अंकों की अधिकता न केवल साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करती है अपितु अन्तिम रूप से चयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए मुख्य-परीक्षा में अभ्यर्थी को एक ऐसे वैकल्पिक विषय का चयन करना चाहिए जो तुलनात्मक रूप से अधिक अंकदायी हो, छोटा हो, स्पष्ट हो तथा रणनीतिक रूप से अनुकूल हो।

हाल के वर्षों में सभी मानविकी विषयों में समाजशास्त्र पुनः सर्वाधिक अंकदायी विषय के रूप में उभरकर सामने आया है। गत वर्षों में जितने भी अभ्यर्थियों ने सिविल सेवा परीक्षा में उच्च स्थान प्राप्त किया है उनमें से अधिकांश का एक वैकल्पिक विषय समाजशास्त्र रहा है। समाजशास्त्र केवल संघ लोक सेवा आयोग के अभ्यर्थियों में ही नहीं बल्कि राज्य लोक सेवा आयोगों ;उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि के अभ्यर्थियों में भी विशेष रूप से लोकप्रिय एवं प्रचलित है। इस बात की पुष्टि गत वर्षों में इस विषय को लेकर सिविल सेवा परीक्षा में उच्च स्थान प्राप्त करने वालों की अधिक संख्या एवं इस संबंध में जारी संघ लोक सेवा आयोग की विभिन्न रिपोर्टों से होती है।