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संघ लोक सेवा आयोग के बारे में

उपनाम       :   यू पी एस सी
स्थापना       :  अक्टूबर 1, 1926 (89 वर्ष पहले)
स्थान           :  धौलपुर हाउस, शाहजहाँ रोड, नयी दिल्ली – 110001
सेवित क्षेत्र   :  भारत
अध्यक्ष        :  अरविन्द सक्सेना
जालपृष्ठ       :  संघ लोक सेवा आयोग जालस्थल

संघ लोक सेवा क्या है?

उच्च सिविल सेवाओं का भारतीयकरण राजनैतिक आंदोलन की प्रमुख मांग बन गई जिसने ब्रिटिश इंडिया गवर्नमेंट को उसकी सेवाओं के लिए राज्य क्षेत्र में एक लोक सेवा आयोग के गठन पर विचार करने पर बाध्य कर दिया। प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्टूबर, 1926 को हुई। तथापि, परामर्श देने के इसके सीमित कार्यों से जनता की आशाएं पूरी न हो सकीं तथा हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं द्वारा इस तथ्य पर निरंतर बल दिए जाने के परिणामस्वरूप, भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत फैडरल पब्लिक सर्विस कमीशन का गठन किया गया।

इस अधिनियम के अंतर्गत, पहली बार, प्रांतीय स्तर पर लोक सेवा आयोगों के गठन का भी प्रावधान किया गया। स्वतंत्रता के बाद, संविधान सभा ने अनुभव किया कि सिविल सेवाओं में निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित करने के साथ ही सेवा हितों की रक्षा के लिए संघीय एवं प्रांतीय, दोनों स्तरों पर लोक सेवा आयोगों को एक सुदृढ़ और स्वायत्त स्थिति प्रदान करने की आवश्यकता है। स्वतंत्र भारत के लिए 26 जनवरी, 1950 को नये संविधान के प्रवर्तन के साथ ही फैडरल पब्लिक सर्विस कमीशन को एक स्वायत्त सत्ता के रूप में संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और संघ लोक सेवा आयोग का नाम दिया गया।

संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना

भारत के संविधान के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत की गई है आयोग में एक अध्यक्ष और दस सदस्य हैं. आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा संबंधी शर्तें संघ लोक सेवा आयोग(सदस्य)विनियमावली, 1969 द्वारा नियंत्रित होती हैं।

आयोग का एक सचिवालय है, जो दो अपर सचिवों, कई संयुक्त सचिवों, उपसचिवों तथा अन्य सहयोगी स्टाफ सहित सचिव की अध्यक्षता में कार्य करता है।

संघ लोक सेवा आयोग को संविधान के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य एवं भूमिका सौंपी गई हैं:- 

  • संघ के अधीन सेवाओं और पदों पर प्रतियोगिता परीक्षाओं के आयोजन के माध्यम से भर्ती;
  • केंद्र सरकार के अधीन सेवाओं तथा पदों पर साक्षात्कार के माध्यम से चयन द्वारा भर्ती;
  • पदोन्नति पर नियुक्ति के साथ-साथ प्रतिनियुक्ति पर स्थानांतरण के लिए अधिकारियों की

उपयुक्तता पर परामर्श देना;

  • विभिन्न सेवाओं तथा पदों पर भर्ती की पद्धति से सम्बध्द सभी मामलों पर सरकार को परामर्श देना;
  • विभिन्न सिविल सेवाओं से सम्बध्द अनुसानिक मामले; और
  • असाधारण पेंशन प्रदान करने; विधिक व्यय आदि की प्रतिपूर्ति से संबंधित विविध मामलेआयोग की मुख्य भूमिका है-केंद्र तथा राज्यों (अर्थात् अखिल भारतीय सेवा) के लिए सामान्य विभिन्न केंद्रीय सिविल सेवाओं तथा पदों एवं सेवाओं में नियुक्ति के लिए व्यक्तियों का चयन करना.