G-20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक: ऊर्जा की खपत का प्रमुख केंद्र बना रहेगा भारत

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 10 अप्रैल 2020 को G-20 असाधारण ऊर्जा मंत्रियों की आभासी बैठक में भाग लिया। भारत, अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवाओं की सप्लाई करने के बाद ऊर्जा के क्षेत्र में भी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने को तैयार है। इस बैठक को सऊदी अरब द्वारा बुलाया गया था और इसकी अध्यक्षता सऊदी अरब ऊर्जा मंत्री  द्वारा की गई थी।

जी-20 देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत इस वैश्विक संकट के दौरान भी ऊर्जा की खपत का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। इस बैठक में मांग में कमी और उत्पादन अधिशेष के बीच स्थिर ऊर्जा बाजारों को सुनिश्चित करने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की गई।

जी-20 समूह के ऊर्जा मंत्रियों की ओर से 11 अप्रैल 2020 को एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी गयी। संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक जी-20 देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने महामारी कोविड-19 की वैश्विक चुनौती के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल एवं ऊर्जा बाजार की स्थिरता को सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई है।

जी-20 देशों के अलावा कई संगठन भी हुए शामिल

कोरोना संकट के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जी-20 देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष देश के रूप में सऊदी अरब ने की। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज़ के साथ जी-20 के सभी देशों के ऊर्जा मंत्री इस बैठक में विशेष रूप से मौजूद रहे। जबकि ऊर्जा के साथ तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन ओपेक, आईईए (इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन) और इंटरनेशनल एनर्जी फोरम (आईईएफ) विशेष रूप से आमंत्रित थे।

उज्ज्वला गैस की नि:शुल्क आपूर्ति

कोरोना संकट को लेकर विश्वभर में जताई जा रही आशंकाओं के बीच ऊर्जा क्षेत्र में मांग कम रहने की आशंका बड़ी-बड़ी आर्थिक महाशक्तियों को सता रही है। इस मौके पर इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Covid-19 से निपटने को लेकर जी-20 देशों की मानवीय पहल की प्रशंसा कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में 8 करोड़ से अधिक लोगों को उज्ज्वला गैस की नि:शुल्क आपूर्ति की जा रही है। 1.7 लाख करोड़ से अधिक के राहत पैकेज के अंतर्गत उठाए गए इस कदम से जहां ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के साथ सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा। वहीं ग्लोबल एनर्जी डिमांड को भारत से रफ्तार मिलेगी।

इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा की मांग को गति देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से और भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।  प्रधान ने तेल बाजार में आ रहे उतार-चढ़ाव पर कहा कि भारत हमेशा तेल बाजार में स्थिरता का पैरोकार रहा है, जिससे कि न सिर्फ उत्पादकों बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा हो। उन्होंने इस मौके पर तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा तेल की आपूर्ति को लेकर उठाए गए प्रभावी कदमों की भी प्रशंसा की।

जी-20 देश की अगली बैठक

बयान में यह भी कहा गया कि तेल बाजार की स्थिति पर जी-20 देश अगली बैठक सितंबर में करेंगे। लेकिन यदि जरूरी हुआ तो सितंबर से पहले भी बैठक हो सकती है। साथ ही सदस्यों ने सिर्फ तेल बाजार की स्थिरता के लिए प्रतिबद्धता जताई। इससे पहले 09 अप्रैल 2020 को ओपेक प्लस बैठक में रिकॉर्ड उत्पादन कटौती के लिए बनी योजना पर अकेले मेक्सिको असहमत था।

कोविड-19 के कारण विश्वभर में कच्चे तेल की मांग और आपूर्ति में असाधारण कमी आई है जिससे ऊर्जा बाजार में काफी अस्थिरता देखी जा रही है। इसके कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लाखों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।