FATF ने पाकिस्तान को ‘ग्रे-लिस्ट’ में बरकरार रखने का फैसला किया

फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को ‘ग्रे-लिस्ट’ में बरकरार रखने का फैसला किया है। पेरिस में 22 फरवरी को हुई FATF की बैठक में यह फैसला लिया गया। FATF द्वारा दिए गये जनवरी 2019 तक की अवधि में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर पाने के कारण ‘ग्रे-लिस्ट’ में बरकरार रखा गया है।

पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को ब्लैक-लिस्ट में डालने की मांग की थी। FATF ने कहा कि अक्टूबर, 2019 तक यदि पाकिस्तान उसकी 27 मांगों पर काम नहीं करता है तो उसे ब्लैक-लिस्ट कर दिया जाएगा। जून 2019 से अक्टूबर 2019 में फिर से इसकी समीक्षा की जायेगी।

फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF): एक दृष्टि

  • FATF पैरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है। इसका काम गैर-कानून आर्थिक मदद (आतंकी फाइनैंसिंग) को रोकने के लिए नियम बनाना है। इसका गठन 1989 में किया गया था।
  • इस संस्था 38 सदस्यीय अंतर-सरकारी निकाय है जो आतंक के वित्त पोषण को रोकने के लिए काम करता है।
  • FATF की ग्रे-लिस्ट या ब्लैक-लिस्ट में डाले जाने पर देश को अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है।

FATF ने पाकिस्तान को फरवरी 2018 में इसे ग्रे-लिस्ट के डाला था। इससे पहले पाकिस्तान साल 2012 से 2015 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा है।