DRDO ने मानव-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी निर्मित मानव एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल का परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल में  किया गया।

परीक्षण

  • इस मानव-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल में इमेज इन्फ्रारेड राडार तथा इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स हैं।
  • यह इसरो द्वारा विकसित मानव एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल की तीसरी पीढ़ी है।
  • यह मारक क्षमता 2.5 किलोमीटर तक है।
  • मानव-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का इस्तेमाल कंधे पर रख कर किया जा सकता है।

MPATGM प्रणाली

MPATGM रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन द्वारा विकसित एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की तीसरी पीढ़ी है। यह अपनी श्रेणी में विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। अभी इसका आधिकारिक नामकरण किया जाना बाकी है। यह द्वतीय पीढ़ी की फ़्रांसिसी मूल की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल मिलान और सोवियत मिसाइल कोंकुर का स्थान लेगी। फिलहाल मिलान और कोंकुर मिसाइलें भारतीय सेना में कार्यरत्त हैं।

‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के लिए भी यह मिसाइल ज़रूरी है। इसकी मारक रेंज 2.5 किलोमीटर है। इसका भार 14.5 किलो है। इसे कंधे पर रखकर भी दागा जा सकता है, इसे दिन व रात दोनों समय में दगा जा सकता है। इसमें उच्च विस्फोटक एंटी टैंक वारहेड का उपयोग किया गया है। यह ‘दागो और भूल जाओ’ के सिद्धांत पर कार्य करती है। यह मिसाइल स्थिर तथा चलनशील दोनों प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध प्रभावशाली है। इस मिसाइल को भारतीय सेना की इन्फेंट्री और पैराशूट बटालियन में तैनात किया जायेगा। इस मिसाइल का निर्माण सशस्त्र बलों की मांग के बाद किया गया है। वर्तमान में भारतीय सेना के पास एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल नाग है, परन्तु यह मिसाइल पोर्टेबल नहीं है।