माइकल देवव्रत पात्रा, जो बने रिजर्व बैंक के नए डिप्टी गवर्नर

केंद्र सरकार ने हाल ही में माइकल देवव्रत पात्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। इस बारे में आदेश कार्मिक मंत्रालय ने जारी किया है। वे इस पद से इस्तीफा देने वाले विरल आचार्य का स्थान लेंगे। विरल आचार्य के इस्तीफे के बाद से यह पद खाली था। उन्होंने जून 2019 में इस पद से इस्तीफा दिया था।

माइकल देवव्रत पात्रा आरबीआई के चौथे डिप्टी गवर्नर होंगे तथा उनके पास भी विरल आचार्य की तरह ही मौद्रिक नीति मामला रहने की उम्मीद है। माइकल देवव्रत पात्रा का कार्यकाल तीन साल का होगा। नये डिप्टी गवर्नर देवव्रत पात्रा पहले मौद्रिक नीति विभाग में कार्यकारी निदेशक के पद पर रह चुके हैं।

आरबीआई में होते हैं चार डिप्टी गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में चार डिप्टी गवर्नर होते हैं। सरकार इनकी नियुक्ति गवर्नर की राय को अहमियत देते हुए करती है। परंपरा के मुताबिक, चार डिप्टी गवर्नर में से दो केंद्रीय बैंक के ही अधिकारी होते हैं। एक डिप्टी गवर्नर कमर्शियल बैंकिंग क्षेत्र से होता है। चौथा डिप्टी गवर्नर कोई जाना माना अर्थशास्त्री होता है।

मौजूदा समय में आरबीआई के तीन डिप्टी गवर्नर- एनएस विश्वनाथन, बीपी कनुनगो और एमके जैन हैं। आरबीआई के चौथे डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा हैं। शक्तिकांत दास आरबीआई के गवर्नर हैं।

कौन हैं माइकल देवव्रत पात्रा?

  • माइकल देवव्रत पात्रा अभी तक कार्यकारी निदेशक के रूप में मौद्रिक नीति विभाग का काम देख रहे थे। उन्होंने आईआईटी मुंबई से अर्थशास्त्र में पीएचडी किया है।
  • वे अक्टूबर 2005 में मौद्रिक नीति विभाग में भेजे जाने से पहले आर्थिक विश्लेषण विभाग में सलाहकार थे।
  • वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के फेलो रह चुके हैं। जहां उन्होंने वित्तीय स्थिरता को लेकर पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च किया था।
  • उन्होंने साल 1985 में आरबीआई ज्वॉइन किया था। वे अक्टूबर 2005 में मौद्रिक नीति विभाग में आने से पहले रिजर्व बैंक में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं।
  • वे मौद्रिक नीति समीति (MPC) के सदस्य भी हैं। उन्होंने पिछले तीन नीतिगत बैठकों में अर्थव्यवस्था की गति को तेजी देने हेतु ब्याज दर में कटौती का समर्थन किया था।

RBI के नए डिप्टी गवर्नर के सामने क्या है चुनौती?

आरबीआई के नए डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा की सबसे बड़ी चुनौती ग्रोथ और मुद्रास्फीति (इनफ्लेशन) के बीच तालमेल बैठाना है। आरबीआई ने अगस्त में जारी अपने सालाना रिपोर्ट में कहा था कि अर्थव्यवस्था चक्रीय मंदी में फंस गई है। बैंक ने तब ये भी कहा था कि मौजूदा मंदी फेज को संरचनात्मक मंदी नहीं कहा जा सकता।