जीएसटी का दो साल का सफर

सन्दर्भ

जीएसटी पर अमल के दो वर्ष पूरे होने पर अब तक हुई प्रगति और आने वाले सुधारों की रूप-रेखा पर नजर डालने का यह उचित समय है। जीएसटी इस उम्मीद के साथ लागू किया गया था कि यह नई कर व्यवस्था एक ओर जहां सरकार के राजस्व में वृद्धि करेगी वहीं देश में लागू कई तरह के अप्रत्यक्ष करों में ढांचागत सुधार करेगी। नि:संदेह यह उम्मीद भी की जा रही थी कि कर प्रशासन एवं करदाताओं द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया में सुधार एवं सरलीकरण होगा। जब तक पर्याप्त राजस्व प्राप्त होने का विश्वास न हो तब तक कर सुधार की कोई भी व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती है।

जीएसटी का उत्कृष्ट प्रदर्शन

अंतर्राष्ट्रीय अनुभव यह रहा है कि जीएसटी को व्यवस्थित होने में दो से पांच वर्ष का समय लगता है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत में जीएसटी के प्रदर्शन को उत्कृष्ट कहा जा सकता है। 2018-19 में गत वर्ष की अपेक्षा औसत मासिक कर संग्रहण में 19.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यदि कर संग्रहण के आंकड़े उत्साहजनक नहीं लगते तो इसका कारण यह है कि जीएसटी के लिए राजस्व के अति महत्वाकांक्षी मानक तय किए गए। जीएसटी में समाहित करों से 2015-16 के राजस्व को आधार बनाते हुए प्रतिवर्ष 14 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया ताकि राज्यों को जीएसटी में न्यूनतम 14 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि सुनिश्चित हो सके। आधार वर्ष में समाहित करों का मासिक औसत लगभग 70000 करोड़ रुपये था और इस पर प्रतिवर्ष 14 प्रतिशत की वृद्धि के आलोक में 2017-18 एवं 2018-19 में अपेक्षित औसत मासिक राजस्व की राशि क्रमश: 90972 करोड़ एवं 103708 करोड़ रुपये होती है।

जीएसटी के मानक राजस्व से कमी

यदि इन दो वर्षों के वास्तविक औसत मासिक राजस्व को देखा जाए तो इस अति-महत्वाकांक्षी मानक से भी मात्र 12.3 एवं 5.4 प्रतिशत की कमी हुई है। इस संदर्भ में दो बातें काफी महत्वपूर्ण है। यह कमी वास्तविक राजस्व से नहीं है, अपितु यह कमी पूर्व निर्धारित मानक से है। इसके साथ ही जीएसटी के दूसरे वर्ष में ही मानक राजस्व से कमी की सीमा में 56 प्रतिशत की कटौती हो सकी है जो काफी उत्साहवर्धक है। यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि अगले दो वर्षों में मानक राजस्व की ऊंची दर को भी जीएसटी राजस्व पार कर सकेगा।

जीएसटी प्रदर्शन में विविधता

वर्ष 2017-18 में सभी राज्यों के संरक्षित राजस्व से 16 प्रतिशत का रेवेन्यू गैप वर्ष 2018-19 में घटकर 13 प्रतिशत रह गया। परंतु राज्यों के जीएसटी प्रदर्शन में काफी विविधता दिखी है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र एवं तेलंगाना जैसे राज्यों का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जबकि मप्र, कर्नाटक, राजस्थान, बंगाल, उप्र जैसे राज्यों में प्रारंभिक कठिनाइयों के बावजूद जीएसटी राजस्व में लगातार सुधार दिख रहा है। 2017-18 में निचले पायदान पर खड़े बिहार, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों के रेवेन्यू गैप में भी तेजी से कमी आ रही है। यह सुखद आश्चर्य है कि उत्तर पूर्व के लगभग सभी राज्य वर्तमान में राजस्व अधिशेष हो गए हैं।

जीएसटी परिषद- कर चोरी पर प्रभावी रोक

जीएसटी को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में जीएसटी परिषद द्वारा पिछले दो वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। परिषद का लगातार प्रयास रहा है कि एक ओर करदाताओं की कठिनाइयों का समाधान हो सके तो दूसरी ओर कर चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों में नया रिटर्न सिस्टम एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। यह व्यवस्था ट्रायल हेतु जुलाई, 2019 से उपलब्ध होगी। इसमें सप्लायर द्वारा निबंधित व्यवसायियों को की गई बिक्री के आंकड़े सिस्टम पर अपलोड किए जाएंगे एवं इसी आधार पर क्रेता व्यवसायी को इस मद में उपलब्ध क्रेडिट का लेखा सिस्टम द्वारा तैयार किया जाएगा। बीजक अपलोड करने एवं उपलब्ध क्रेडिट का लेखा-जोखा व्यवसायियों को उपलब्ध कराई गई ऑनलाइन-ऑफलाईन टूल से सिस्टम द्वारा दिया जाएगा। इसकी सहायता से व्यवसायी अपने आंकड़ों से सिस्टम द्वारा तैयार किए गए अपने खरीद एवं क्रेडिट के आंकड़ों का मिलान कर सकेंगे।

त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने की सुविधा

नए रिटर्न सिस्टम में पांच करोड़ रुपये से कम की सालाना बिक्री वाले व्यवसायी, जो करदाताओं की कुल संख्या के 80 प्रतिशत से अधिक हैैं, को मासिक भुगतान के साथ त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने की सुविधा होगी। ऐसे छोटे व्यवसायियों के लिए ‘सहज’ एवं ‘सुगम’ जैसा सरल रिटर्न उपलब्ध होगा। कंपाउडिंग के अधीन व्यवसायियों द्वारा वार्षिक रिटर्न दाखिल किया जाएगा। अन्य सभी व्यवसायियों द्वारा मासिक भुगतान के साथ मासिक रिटर्न देना होगा। इसमें एसएमएस के माध्यम से ही ‘निल’ रिटर्न दाखिल हो सकेगा। इस सुविधा से व्यवसायियों के एक वर्ग को बड़ी राहत होगी। रिटर्न दाखिल प्रक्रिया के सरलीकरण के साथ-साथ यह आशा भी की जा रही है कि नए रिटर्न सिस्टम के सहारे टैक्स गबन पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

फर्जी बीजक पर फर्जी क्रेडिट

जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 को स्थगित किए जाने के कारण फर्जी बीजक पर फर्जी क्रेडिट लिए जाने की आशंका जताई जा रही थी और ऐसे अनेक मामले में भी उजागर हुए हैैं। अब तक 2160 ऐसे मामले सामने आए हैैं, जिनमें 13828.67 करोड़ रुपये के क्रेडिट की राशि निहित थी। इन मामलों में 196 लोग गिरफ्तार भी किए गए। नई रिटर्न व्यवस्था में क्रेडिट का सिस्टम द्वारा ही सत्यापन संभव हो सकेगा। सिस्टम आधारित सत्यापन के कारण क्रेडिट दुरूपयोग के मामलों में प्रभावकारी एवं त्वरित कार्रवाई संभव हो पाएगी जिससे राजस्व में वृद्धि होगी।

ई-वे बिल की व्यवस्था

ई-वे बिल की व्यवस्था के कारण राज्यों की सीमाओं पर जांच चौकियां तो समाप्त हो गईं, परंतु वाहनों की चेकिंग अभी भी पूरी तरह सिस्टम आधारित नहीं हो पाई। इसमें आरएफआईडी/फास्टैग तकनीक से ई-वे बिल का सत्यापन वाहन को रोके बिना किया जा सकेगा जिससे ई-वे बिल के दुरुपयोग के साथ-साथ जांच के दौरान होने वाली कठिनाईयों से भी बचा जा सकेगा। यह व्यवस्था तत्काल राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रस्तावित है। इसे अगले वित्त वर्ष से लागू किए जाने पर विचार हो रहा है। एक अन्य बड़े सुधार पर भी मंथन चल रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक एनवायसिंग की सुविधा

अगले वित्त वर्ष से 50 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायियों के लिए स्वेच्छा से बिजनेस-टू-बिजनेस के मामले में इलेक्ट्रॉनिक एनवायसिंग की सुविधा उपलब्ध कराए जाने का विचार है। इसमें सिस्टम के माध्यम से बीजक निर्गत किए जा सकेंगे और इसी आधार पर ई-वे बिल सिस्टम द्वारा निर्गत हो सकेगा। विवरणी भी इनके आधार पर तैयार हो सकेगी।

जीएसटी व्यवस्था में सुधार

जीएसटी व्यवस्था में सरलता के उद्देश्य से हो रहे निरंतर सुधार के कारण सिस्टम में भी अनेक परिवर्तन आवश्यक हो जाते हैं। सिस्टम को चलाते हुए इसमें वांछित सुधार वास्तव में बहुत चुनौती भरा कार्य है। मुझे आशा है कि इसका सामना हम सफलतापूर्वक करेंगे। जीएसटी लागू होने के बाद का अनुभव हमें काफी आश्वस्त करता है।