कैबिनेट ने सहकारी बैंकों को आरबीआई के नियामक नियंत्रण के तहत लाने हेतु संशोधन को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियामक नियंत्रण के तहत लाने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने 05 फरवरी 2020 को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधनों को अपनी मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अब सभी कॉपरेटिव बैंक को आरबीआई रेगुलेट करेगी। देशभर लगभग 1500 सहकारी (को-ऑपरेटिव) बैंक हैं। आरबीआई इससे पहले निजी और सरकारी नियंत्रित बैंकों को रेगुलेट करता था।

सरकार द्वारा यह कदम किसी भी तरह के कदाचार को रोकने और बेहतर रेगुलेशन को सुनिश्चित करने हेतु किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि संशोधन के बाद सभी सहकारी बैंक भी आरबीआई के रेगुलेशन के अंदर आ जाएंगे।

RBI द्वारा तय अहर्ताओं का पालन अनिवार्य

आरबीआई द्वारा इन संशोधनों के बाद बैंक में प्रबंधन स्तर की नियुक्ति हेतु तय अहर्ताओं का पालन अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त सीईओ की नियुक्ति हेतु पहले आरबीआई से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

पीएमसी बैंक घोटाले के बाद नियमों में संशोधन

दरअसल पिछले दिनों लगातार देश के विभिन्न हिस्सों से कॉपरेटिव बैंक में फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं। इसके बाद सरकार ऐसे मामलों को रोकने हेतु प्लान बनाने में जुटी थी। साल 2019 में पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक (पीएमसी बैंक) का मामला सामने आया था। आरबीआई ने तब इस बैंक को तुरंत अपने नियंत्रण में ले लिया था।

बजट में बैंक को लेकर बड़ी घोषणा

केंद्र सरकार ने बजट में बैंकों में जमा राशि पर बीमा कवर मौजूदा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कहा कि जमाकर्ताओं के पैसे सुरक्षित हो, इसके लिए एक बेहतरीन तंत्र बनाया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त सरकार का कहना है कि सरकारी बैंकों का विलय इसी दिशा में कदम है। सरकार ने बजट में आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने का घोषणा किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2020 को केंद्रीय बजट पेश करते हुए इसका घोषणा किया था।