इसरो द्वारा चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्च किये जाने की घोषणा

इसरो (ISRO) ने चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की तारीख और समय की घोषणा कर दी है. ISRO की ओर जारी जानकारी के अनुसार चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई तड़के 2.51 बजे किया जायेगा. इसरो के मुताबिक GSLV मार्क 3 रॉकेट 15 मिनट में ऑर्बिटर को पृथ्वी की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित कर देगा.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) ने चंद्रयान-2 मिशन की पहली तस्वीरें जारी की हैं. यह उम्मीद लगाई जा रही है कि चंद्रयान-2 को 9 से 16 जुलाई के बीच छोड़ा जाएगा. चंद्रयान-2 में एक भी पेलोड विदेशी नहीं है. इसके सभी हिस्से पूरी तरह से स्वदेशी हैं, जबकि, चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर में 3 यूरोप और 2 अमेरिका के पेलोड्स थे.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा 11 वर्ष बाद चंद्रमा की सतह को खंगालने के लिए तैयारी की जा रही है. इसरो द्वारा उम्मीद जताई गई है कि चंद्रयान-2 चंद्रमा पर 6 सितंबर को दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने पिछले दिनों कहा था कि छह सितंबर को चंद्रमा पर लैंडिंग की संभावना है. उन्होंने कहा था, “एक खास स्थान पर लैंडिंग होने जा रही है, जहां पर इससे पहले कोई नहीं पहुंचा है.”

इसरो द्वारा जारी जानकारी के अनुसार चंद्रयान-2 दूसरा चंद्र अभियान है और इसमें तीन मॉडयूल हैं ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान). भारत ने चंद्रयान-1 को 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया था, जिसके एक दशक बाद 800 करोड़ रुपये की लागत से चंद्रयान-2 को लांच किया जायेगा.

मिशन की अवधि और अन्य तथ्य
अवधि: ऑर्बिटर- 1 साल, लैंडर (विक्रम)- 15 दिन, रोवर (प्रज्ञान)- 15 दिन

भार: ऑर्बिटर- 2379 किलो, लैंडर (विक्रम)- 1471 किलो, रोवर (प्रज्ञान)- 27 किलो

मिशन का कुल वजनः 3877 किलो

ऑर्बिटरः चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर स्थापित किया जायेगा. यह चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा. इसमें 8 पेलोड हैं. साथ ही इसरो से भेजे गए कमांड को लैंडर और रोवर तक पहुंचाएगा. इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाकर 2015 में ही इसरो को सौंप दिया था.

लैंडर (विक्रम ): इसरो द्वारा लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है. इसमें 4 पेलोड हैं. यह 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद ने बनाया था. बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया. रूस के मना करने पर इसरो ने स्वदेशी लैंडर बनाया है.

रोवर (प्रज्ञान): यह एक रोबोट है और 27 किलोग्राम वजनी इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मदारी होगी. इस रोबोट में दो पेलोड हैं. चांद की सतह पर यह करीब 400 मीटर की दूरी तय करेगा. इस दौरान यह विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. फिर चांद से प्राप्त जानकारी को विक्रम लैंडर पर भेजेगा. लैंडर वहां से ऑर्बिटर को डाटा भेजेगा. फिर ऑर्बिटर उसे इसरो सेंटर पर भेजेगा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लगेंगे. अर्थात यह कहा जा सकता है कि प्रज्ञान रोबोट से भेजी गई जानकारी को भारत में मौजूद इसरो सेंटर तक आने में लगभग 15 मिनट लगेंगे.