अमिताव घोष को 54वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया

प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक अमिताव घोष को ज्ञानपीठ पुरस्कार 2018  प्रदान किया गया, उन्हें यह सम्मान अंग्रेजी साहित्य में दिए गये योगदान के लिए दिया गया है। उन्हें यह सम्मान पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गाँधी द्वारा प्रदान किया गया, वे इस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस सम्मान समारोह का आयोजन नई दिल्ली के हैबिटैट सेंटर में किया गया।

रोचक तथ्य : अमिताव घोष ज्ञानपीठ पुरस्कार को जीतने वाले पहले अंग्रेजी लेखक हैं, इससे पहले यह पुरस्कार केवल भारतीय भाषाओँ के लेखकों ने ही जीता है।

अमिताव घोष

अमिताव घोष का जन्म 1956 कलकत्ता में हुआ था, उन्होंने दून स्कूल देहरादून, सेंट स्टीफंस कॉलेज,दिल्ली विश्वविद्यालय तथा दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अपनी पढ़ाई की है। उन्हें 2007 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2009 में रॉयल सोसाइटी ऑफ़ लिटरेचर के फेलो के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें 2015 में फोर्ड फाउंडेशन आर्ट ऑफ़ चेंज फेलो नामित किया गया था।

अमिताव घोष की रचनाएँ

The Circle of Reason (1986), The Shadow Lines (1988), The Calcutta Chromosome (1995), The Glass Palace (2000), The Hungry Tide (2004), Sea of Poppies (20008), River of Smoke (2011), Flood of Fire (2015).

Antique Land (1992), Dancing in Cambodia and at Large in Burma (1998), Countdown (1999), The Imam and the Indian (2002), The Great Derangement: Climate Change and the Unthinkable (2016).

ज्ञानपीठ पुरस्कार

इस पुरस्कार की स्थापना 1961 में की गयी थी। इस पुरस्कार के द्वारा भारतीय ज्ञानपीठ संविधान में शामिल 22 भारतीय भाषाओँ में रचना करने वाले साहित्यकारों को सम्मानित करती है। शुरू में इस पुरस्कार के लिए अंग्रेजी भाषा को शामिल नहीं किया गया था,  परन्तु 49वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद अंग्रेजी भाषा को भी इस पुरस्कार के लिए शामिल किया गया। इस पुरस्कार के विजेताओं को 11 लाख रुपये नकद राशि, प्रशस्ति पत्र तथा देवी सरस्वती की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है। पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रसिद्ध मलयालम जी.एस. कुरूप को प्रदान किया गया था।